पटना | विशेष संवाददाता बिहार की राजनीति ने आज वह मोड़ ले लिया जिसकी पटकथा पिछले कई महीनों से लिखी जा रही थी। दो दशकों तक बिहार की सत्ता के केंद्र रहे नीतीश कुमार के इस्तीफे के बाद, भारतीय जनता पार्टी ने अपने फायरब्रांड नेता और वर्तमान उपमुख्यमंत्री सम्राट चौधरी को विधायक दल का नेता चुन लिया है। इसके साथ ही बिहार में अब पूर्ण रूप से ‘भाजपा केंद्रित’ सरकार का मार्ग प्रशस्त हो गया है।
इस्तीफे से ताजपोशी तक का घटनाक्रम
मंगलवार दोपहर राजभवन जाकर नीतीश कुमार ने राज्यपाल लेफ्टिनेंट जनरल (रिटायर्ड) सैयद अता हसनैन को अपना त्यागपत्र सौंपा। इसके तुरंत बाद भाजपा प्रदेश कार्यालय में हुई कोर कमेटी की बैठक में सर्वसम्मति से सम्राट चौधरी के नाम पर मुहर लगा दी गई।
“यह बिहार के विकास और सुशासन के प्रति भाजपा की प्रतिबद्धता की जीत है। हम एक नए और आत्मनिर्भर बिहार के संकल्प के साथ आगे बढ़ेंगे।” – सम्राट चौधरी (मुख्यमंत्री मनोनीत)
सम्राट चौधरी ही क्यों? – राजनैतिक विश्लेषण
भाजपा आलाकमान का यह फैसला महज एक पद परिवर्तन नहीं, बल्कि एक गहरी चुनावी रणनीति का हिस्सा माना जा रहा है:
लव-कुश समीकरण में सेंध: नीतीश कुमार के पारंपरिक वोट बैंक (कुर्मी-कोइरी) में सम्राट चौधरी की पकड़ बेहद मजबूत है। उनके मुख्यमंत्री बनने से इस बड़े वोट ब्लॉक का झुकाव सीधे भाजपा की ओर होने की संभावना है।
आक्रामक नेतृत्व: तेजस्वी यादव की बढ़ती सक्रियता के बीच भाजपा को एक ऐसे चेहरे की तलाश थी जो सदन से लेकर सड़क तक विपक्ष को कड़ा जवाब दे सके।
संगठन पर पकड़: प्रदेश अध्यक्ष और डिप्टी सीएम के रूप में चौधरी ने कार्यकर्ताओं के बीच अपनी जो छवि बनाई है, वह आने वाले 2027 के चुनावों के लिए संजीवनी साबित हो सकती है।
नीतीश कुमार की नई भूमिका और जदयू का भविष्य
नीतीश कुमार के इस कदम को ‘राजनीतिक संन्यास’ के बजाय ‘रणनीतिक पीछे हटने’ (Strategic Retreat) के रूप में देखा जा रहा है। चर्चा है कि वे अब केंद्र की राजनीति में सक्रिय होंगे या एनडीए के मार्गदर्शक की भूमिका निभाएंगे। वहीं, जदयू की कमान अब निशांत कुमार या किसी युवा चेहरे को सौंपकर पार्टी के अस्तित्व को बचाने की कोशिश की जा सकती है।
कैबिनेट का नया स्वरूप
सूत्रों की मानें तो नई सरकार में दो नए उपमुख्यमंत्री बनाए जा सकते हैं, जिसमें एक नाम दलित समुदाय से और दूसरा सवर्ण समाज से होने की उम्मीद है। मंत्रिमंडल में युवाओं और नए चेहरों को तरजीह दी जाएगी ताकि “बदलता बिहार” का संदेश स्पष्ट रूप से जनता तक पहुंचे।
चुनौतियां और संभावनाएं
नवनियुक्त मुख्यमंत्री के सामने पहली बड़ी चुनौती राज्य की चरमराती कानून व्यवस्था और बेरोजगारी के मुद्दे पर विपक्ष के हमलों को झेलना होगा। साथ ही, सहयोगी दलों के साथ सामंजस्य बिठाकर 2027 के विधानसभा चुनावों के लिए जमीन तैयार करना सम्राट चौधरी की अग्निपरीक्षा होगी।
